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आदि पर्व
अध्याय १
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सूत उवाच
यदाश्रौषं कश्मलेनाभिपन्ने; रथोपस्थे सीदमानेऽर्जुने वै |  १२४   क
कृष्णं लोकान्दर्शय़ानं शरीरे; तदा नाशंसे विजय़ाय़ सञ्जय़ ||  १२४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति