आदि पर्व  अध्याय ११४

वैशम्पाय़न उवाच

अनूना चानवद्या च प्रिय़मुख्या गुणावरा |  ५०   क
अद्रिका च तथा साची मिश्रकेशी अलम्वुसा ||  ५०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति