आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

यत्तद्यतिवरा युक्ता ध्यानय़ोगवलान्विताः |  १९७   क
प्रतिविम्वमिवादर्शे पश्यन्त्यात्मन्यवस्थितम् ||  १९७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति