आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

तपो न कल्कोऽध्ययनं न कल्कः; स्वाभाविको वेदविधिर्न कल्कः |  २१०   क
प्रसह्य वित्ताहरणं न कल्क; स्तान्येव भावोपहतानि कल्कः ||  २१०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति