आदि पर्व  अध्याय ७५

वैशम्पाय़न उवाच

प्रतिश्रुते दासभावे दुहित्रा वृषपर्वणः |  २३   क
देवय़ानी नृपश्रेष्ठ पितरं वाक्यमव्रवीत् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति