आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

निष्प्रभेऽस्मिन्निरालोके सर्वतस्तमसावृते |  २७   क
वृहदण्डमभूदेकं प्रजानां वीजमक्षय़म् ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति