आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

क्षेत्रे विचित्रवीर्यस्य कृष्णद्वैपाय़नः पुरा |  ५४   क
त्रीनग्नीनिव कौरव्याञ्जनय़ामास वीर्यवान् ||  ५४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति