आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

मृगव्यवाय़निधने कृच्छ्रां प्राप स आपदम् |  ६८   क
जन्मप्रभृति पार्थानां तत्राचारविधिक्रमः ||  ६८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति