आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

ऋषिभिश्च तदानीता धार्तराष्ट्रान्प्रति स्वय़म् |  ७१   क
शिशवश्चाभिरूपाश्च जटिला व्रह्मचारिणः ||  ७१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति