आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

गुरुशुश्रूषय़ा कुन्त्या यमय़ोर्विनय़ेन च |  ८१   क
तुतोष लोकः सकलस्तेषां शौर्यगुणेन च ||  ८१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति