सौप्तिक पर्व  अध्याय १

सञ्जय़ उवाच

न लेभे स तु निद्रां वै दह्यमानोऽतिमन्युना |  ३३   क
वीक्षां चक्रे महावाहुस्तद्वनं घोरदर्शनम् ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति