आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ९३

श्वशुर उवाच

आत्ममांसप्रदानेन शिविरौशीनरो नृपः |  ७५   क
प्राप्य पुण्यकृताँल्लोकान्मोदते दिवि सुव्रतः ||  ७५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति