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शान्ति पर्व
अध्याय ८१
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भीष्म उवाच
नैव द्वौ न त्रय़ः कार्या न मृष्येरन्परस्परम् |  २५   क
एकार्थादेव भूतानां भेदो भवति सर्वदा ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति