स्त्री पर्व  अध्याय १

धृतराष्ट्र उवाच

तन्मामद्यैव पश्यन्तु पाण्डवाः संशितव्रतम् |  २०   क
विवृतं व्रह्मलोकस्य दीर्घमध्वानमास्थितम् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति