शान्ति पर्व  अध्याय ३३०

श्रीभगवानु उवाच

अथ रुद्रविघातार्थमिषीकां जगृहे नरः |  ४८   क
मन्त्रैश्च संय़ुय़ोजाशु सोऽभवत्परशुर्महान् ||  ४८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति