स्त्री पर्व  अध्याय १

वैशम्पाय़न उवाच

अर्थान्न शोचन्प्राप्नोति न शोचन्विन्दते सुखम् |  ३१   क
न शोचञ्श्रिय़माप्नोति न शोचन्विन्दते परम् ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति