स्त्री पर्व  अध्याय १

वैशम्पाय़न उवाच

विस्फुलिङ्गा इव ह्येतान्दहन्ति किल मानवान् |  ३६   क
जहीहि मन्युं वुद्ध्या वै धारय़ात्मानमात्मना ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति