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अनुशासन पर्व
अध्याय १
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गौतम्यु उवाच
नास्मिन्हते पन्नगे पुत्रको मे; सम्प्राप्स्यते लुव्धक जीवितं वै |  २४   क
गुणं चान्यं नास्य वधे प्रपश्ये; तस्मात्सर्पं लुव्धक मुञ्च जीवम् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति