अनुशासन पर्व  अध्याय १

भीष्म उवाच

को न्वर्जुनक दोषोऽत्र विद्यते मम वालिश |  २८   क
अस्वतन्त्रं हि मां मृत्युर्विवशं यदचूचुदत् ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति