अनुशासन पर्व  अध्याय १

लुव्धक उवाच

किल्विषी चापि मे वध्यः किल्विषी चासि पन्नग |  ३२   क
आत्मानं कारणं ह्यत्र त्वमाख्यासि भुजङ्गम ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति