अनुशासन पर्व  अध्याय १

सर्प उवाच

एवं सति न दोषो मे नास्मि वध्यो न किल्विषी |  ३५   क
किल्विषं समवाय़े स्यान्मन्यसे यदि किल्विषम् ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति