अनुशासन पर्व  अध्याय १

लुव्धक उवाच

युवामुभौ कालवशौ यदि वै मृत्युपन्नगौ |  ५९   क
हर्षक्रोधौ कथं स्यातामेतदिच्छामि वेदितुम् ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति