आश्वमेधिक पर्व  अध्याय १

वैशम्पाय़न उवाच

स्वस्ति चेदिच्छसे राजन्कुलस्यात्मन एव च |  १२   क
वध्यतामेष दुष्टात्मा मन्दो राजा सुय़ोधनः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति