भीष्म पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

पद्मगर्भ विशालाक्ष जय़ लोकेश्वरेश्वर |  ४४   क
भूतभव्यभवन्नाथ जय़ सौम्यात्मजात्मज ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति