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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
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जनमेजय़ उवाच
किय़न्तं चैव कालं ते पितरो मम पूर्वकाः |  ३   क
स्थिता राज्ये महात्मानस्तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति