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भीष्म पर्व
अध्याय ११४
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सञ्जय़ उवाच
कृन्तन्ति मम गात्राणि माघमासे गवामिव |  ६०   क
अर्जुनस्य इमे वाणा नेमे वाणाः शिखण्डिनः ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति