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वन पर्व
अध्याय २५६
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भीमसेन उवाच
स देवं शरणं गत्वा विरूपाक्षमुमापतिम् |  २५   क
तपश्चचार विपुलं तस्य प्रीतो वृषध्वजः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति