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स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
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वैशम्पाय़न उवाच
समागच्छ यथान्याय़ं राज्ञा दुर्योधनेन वै |  १८   क
स्वर्गोऽय़ं नेह वैराणि भवन्ति मनुजाधिप ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति