स्वर्गारोहण पर्व  अध्याय १

वैशम्पाय़न उवाच

क्व नु ते पार्थिवा व्रह्मन्नैतान्पश्यामि नारद |  २५   क
विराटद्रुपदौ चैव धृष्टकेतुमुखांश्च तान् ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति