उद्योग पर्व  अध्याय ७६

अर्जुन उवाच

स नाम सम्यग्वर्तेत पाण्डवेष्विति माधव |  १९   क
न मे सञ्जाय़ते वुद्धिर्वीजमुप्तमिवोषरे ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति