सभा पर्व  अध्याय १

वैशम्पाय़न उवाच

प्रतिगृह्य तु तद्वाक्यं सम्प्रहृष्टो मय़स्तदा |  १२   क
विमानप्रतिमां चक्रे पाण्डवस्य सभां मुदा ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति