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सभा पर्व
अध्याय १
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वैशम्पाय़न उवाच
स कालं कञ्चिदाश्वस्य विश्वकर्मा प्रचिन्त्य च |  १६   क
सभां प्रचक्रमे कर्तुं पाण्डवानां महात्मनाम् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति