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अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
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वासुदेव उवाच
नास्ति किञ्चित्परं भूतं महादेवाद्विशां पते |  ६   क
इह त्रिष्वपि लोकेषु भूतानां प्रभवो हि सः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति