वन पर्व  अध्याय १४९

वैशम्पाय़न उवाच

वलिहोमनमस्कारैर्मन्त्रैश्च भरतर्षभ |  २४   क
दैवतानि प्रसादं हि भक्त्या कुर्वन्ति भारत ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति