विराट पर्व  अध्याय १

युधिष्ठिर उवाच

एवमेतन्महावाहो यथा स भगवान्प्रभुः |  ११   क
अव्रवीत्सर्वभूतेशस्तत्तथा न तदन्यथा ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति