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भीष्म पर्व
अध्याय १७
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सञ्जय़ उवाच
यथा स भगवान्व्यासः कृष्णद्वैपाय़नोऽव्रवीत् |  १   क
तथैव सहिताः सर्वे समाजग्मुर्महीक्षितः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति