आदि पर्व  अध्याय ५

सूत उवाच

शंस मे कस्य भार्येय़मग्ने पृष्ट ऋतेन वै |  १८   क
सत्यस्त्वमसि सत्यं मे वद पावक पृच्छते ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति