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कर्ण पर्व
अध्याय ६६
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कृष्ण उवाच
स चित्रवर्मेषुवरो विदार्य; प्राणान्निरस्यन्निव साधु मुक्तः |  २७   क
कर्णस्य पीत्वा रुधिरं विवेश; वसुन्धरां शोणितवाजदिग्धः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति