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विराट पर्व
अध्याय ५५
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कर्ण उवाच
यदि शक्रः स्वय़ं पार्थ युध्यते तव कारणात् |  ११   क
तथापि न व्यथा काचिन्मम स्याद्विक्रमिष्यतः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति