द्रोण पर्व  अध्याय १

जनमेजय़ उवाच

धृतराष्ट्रस्तदा राजा शोकव्याकुलचेतनः |  २   क
किमचेष्टत विप्रर्षे हते पितरि वीर्यवान् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति