द्रोण पर्व  अध्याय १

सञ्जय़ उवाच

स्वाधर्षा हतसिंहेव महती गिरिकन्दरा |  २७   क
भारती भरतश्रेष्ठ पतिते जाह्नवीसुते ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति