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शल्य पर्व
अध्याय २३
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सञ्जय़ उवाच
उक्तोऽहं वहुशस्तात विदुरेण महात्मना |  ३७   क
न जीवन्दास्यते भागं धार्तराष्ट्रः कथञ्चन ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति