द्रोण पर्व  अध्याय १

जनमेजय़ उवाच

तस्मिन्हते तु भगवन्केतौ सर्वधनुष्मताम् |  ४   क
यदचेष्टत कौरव्यस्तन्मे व्रूहि द्विजोत्तम ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति