menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय १
chevron_left
chevron_right
जनमेजय़ उवाच
दुर्मरं वत मन्येऽहं नृणां कृच्छ्रेऽपि वर्तताम् |  २१   क
यत्र कर्णं हतं श्रुत्वा नात्यजज्जीवितं नृपः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति