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शल्य पर्व
अध्याय १
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः शल्यो महाराज कृत्वा कदनमाहवे |  १०   क
पाण्डुसैन्यस्य मध्याह्ने धर्मराजेन पातितः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति