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शल्य पर्व
अध्याय १
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वैशम्पाय़न उवाच
तथान्यैश्च सुहृद्भिश्च ज्ञातिभिश्च हितैषिभिः |  २३   क
तमेव चार्थं ध्याय़न्तं कर्णस्य निधनं प्रति ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति