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शल्य पर्व
अध्याय १
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वैशम्पाय़न उवाच
पाञ्चालाश्च नरव्याघ्राश्चेदय़श्च निषूदिताः |  ३०   क
तव पुत्रा हताः सर्वे द्रौपदेय़ाश्च भारत |  ३०   ख
कर्णपुत्रो हतः शूरो वृषसेनो महावलः ||  ३०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति