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शल्य पर्व
अध्याय १
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वैशम्पाय़न उवाच
कालेन निहतं सर्वं जगद्वै भरतर्षभ |  ३६   क
दुर्योधनं वै पुरतः कृत्वा वैरस्य भारत ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति