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शान्ति पर्व
अध्याय ९४
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वामदेव उवाच
एतानि यस्य गुप्तानि स राजा राजसत्तम |  २५   क
सततं वर्तमानोऽत्र राजा भुङ्क्ते महीमिमाम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति