आदि पर्व  अध्याय ३७

सूत उवाच

आविष्टः स तु कोपेन शशाप नृपतिं तदा |  ११   क
वार्युपस्पृश्य तेजस्वी क्रोधवेगवलात्कृतः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति